रोमांटिक शायरी हिंदी में Love Shayari in Hindi

रोमांटिक शायरी हिंदी में Love Shayari in Hindi: आइये हम इस पोस्ट में कुछ रोमांटिक शायरी देखते हैं:
मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने काउसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले– मिर्ज़ा ग़ालिब
इश्क़ ने ‘ग़ालिब’ निकम्मा कर दियावर्ना हम भी आदमी थे काम के– मिर्ज़ा ग़ालिब
कोई समझे तो एक बात कहूँइश्क़ तौफ़ीक़ है गुनाह नहीं– फ़िराक़ गोरखपुरी
दिल धड़कने का सबब याद आयावो तिरी याद थी अब याद आया– नासिर काज़मी
उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलोधड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है– राहत इंदौरी
होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ हैइश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है– निदा फ़ाज़ली
इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ‘ग़ालिब’कि लगाए न लगे और बुझाए न बने– मिर्ज़ा ग़ालिब
न पूछो हुस्न की तारीफ़ हम सेमोहब्बत जिस से हो बस वो हसीं है– आदिल फ़ारूक़ी
चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद हैहम को अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है– हसरत मोहानी
हुआ है तुझ से बिछड़ने के बा’द ये मा’लूमकि तू नहीं था तिरे साथ एक दुनिया थी– अहमद फ़राज़
तुम मुझे छोड़ के जाओगे तो मर जाऊँगायूँ करो जाने से पहले मुझे पागल कर दो– बशीर बद्र
हमें भी नींद आ जाएगी हम भी सो ही जाएँगेअभी कुछ बे-क़रारी है सितारो तुम तो सो जाओ– क़तील शिफ़ाई
अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाएअब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए– उबैदुल्लाह अलीम
और क्या देखने को बाक़ी हैआप से दिल लगा के देख लिया– फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
इश्क़ नाज़ुक-मिज़ाज है बेहदअक़्ल का बोझ उठा नहीं सकता– अकबर इलाहाबादी
गिला भी तुझ से बहुत है मगर मोहब्बत भीवो बात अपनी जगह है ये बात अपनी जगह– बासिर सुल्तान काज़मी
दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैंकितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं– जिगर मुरादाबादी
मैं तो ग़ज़ल सुना के अकेला खड़ा रहासब अपने अपने चाहने वालों में खो गए– कृष्ण बिहारी नूर
ऐ मोहब्बत तिरे अंजाम पे रोना आयाजाने क्यूँ आज तिरे नाम पे रोना आया– शकील बदायुनी
रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आआ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ– अहमद फ़राज़
और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवाराहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा– फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दोन जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए– बशीर बद्र
तुम मोहब्बत को खेल कहते होहम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली– बशीर बद्र
तुम से मिलती-जुलती मैं आवाज़ कहाँ से लाऊँगाताज-महल बन जाए अगर मुम्ताज़ कहाँ से लाऊँगा– साग़र आज़मी
शाम ढले ये सोच के बैठे हम अपनी तस्वीर के पाससारी ग़ज़लें बैठी होंगी अपने अपने मीर के पास– साग़र आज़मी
वैसे तो सभी ने मुझे बदनाम किया हैतू भी कोई इल्ज़ाम लगाने के लिए आ– अज्ञात
तेरी जानिब आ रहा हूँ रूह की तस्कीं को मैंहसरतें दिल की मैं दुनिया में निकाल आया बहुत– अदील ज़ैदी
दिल की धड़कन को सुना ग़ौर से कल रात ‘अदील’जिस को मैं ढूँढता रहता हूँ बसा है मुझ में– अदील ज़ैदी
उस ने आँचल से निकाली मिरी गुम-गश्ता बयाज़और चुपके से मोहब्बत का वरक़ मोड़ दिया– जावेद सबा
तुम मिटा सकते नहीं दिल से मेरा नाम कभीफिर किताबों से मिटाने की ज़रूरत क्या है– अज्ञात
उन को भूले हुए अपने ही सितम याद आएजब किसी ग़ैर ने तड़पाया तो हम याद आए– अज्ञात
आज की शाम गुज़ारेंगे हम छतरी मेंबारिश होगी ख़बरें सुन कर आया हूँ– इलियास बाबर आवान
टकरा गया वो मुझ से किताबें लिए हुएफिर मेरा दिल और उस की किताबें बिखर गईं– अज्ञात
तुझ से बिछड़ूँ तो तिरी ज़ात का हिस्सा हो जाऊँजिस से मरता हूँ उसी ज़हर से अच्छा हो जाऊँ– अहमद कमाल परवाज़ी
बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगीलोग बे-वज्ह उदासी का सबब पूछेंगे– कफ़ील आज़र अमरोहवी
मुझ से तो दिल भी मोहब्बत में नहीं ख़र्च हुआतुम तो कहते थे कि इस काम में घर लगता है– अब्बास ताबिश
दिल से उठता है सुब्ह-ओ-शाम धुआँकोई रहता है इस मकाँ में अभी– अंजुम रूमानी
यूँ तिरी याद में दिन रात मगन रहता हूँदिल धड़कना तिरे क़दमों की सदा लगता है– शहज़ाद अहमद
हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता थालेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था– अज्ञात
रात तेरी यादों ने दिल को इस तरह छेड़ाजैसे कोई चुटकी ले नर्म नर्म गालों में– बशीर बद्र
सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगाइतना मत चाहो उसे वो बेवफ़ा हो जाएगा– बशीर बद्र
मोहब्बत की तो कोई हद, कोई सरहद नहीं होतीहमारे दरमियाँ ये फ़ासले, कैसे निकल आए– ख़ालिद मोईन
दिल सुलगता है तिरे सर्द रवय्ये से मिरादेख अब बर्फ़ ने क्या आग लगा रक्खी है– अनवर मसूद
देखो ये किसी और की आँखें हैं कि मेरीदेखूँ ये किसी और का चेहरा है कि तुम हो– अहमद फ़राज़
सुपुर्द कर के उसे चाँदनी के हाथों मेंमैं अपने घर के अँधेरो को लौट आऊँगी– परवीन शाकिर
ख़्वाबों के उफ़ुक़ पर तिरा चेहरा हो हमेशाऔर मैं उसी चेहरे से नए ख़्वाब सजाऊँ– अतहर नफ़ीस
मैं ख़याल हूँ किसी और का मुझे सोचता कोई और हैसर-ए-आईना मिरा अक्स है पस-ए-आईना कोई और है– सलीम कौसर
इश्क़ से तबीअत ने ज़ीस्त का मज़ा पायादर्द की दवा पाई दर्द-ए-बे-दवा पाया– मिर्ज़ा ग़ालिब
हम बहुत दूर निकल आए हैं चलते चलतेअब ठहर जाएँ कहीं शाम के ढलते ढलते– इक़बाल अज़ीम
जाती है धूप उजले परों को समेट केज़ख़्मों को अब गिनूँगा मैं बिस्तर पे लेट के– शकेब जलाली
अपनी तबाहियों का मुझे कोई ग़म नहींतुम ने किसी के साथ मोहब्बत निभा तो दी– साहिर लुधियानवी
एक मिस्रा है ज़िंदगी मेरीआप चाहें तो शेर हो जाए– अज्ञात
मोहब्बत करने वाले कम न होंगेतिरी महफ़िल में लेकिन हम न होंगे– हफ़ीज़ होशियारपुरी
इस क़दर भी तो न जज़्बात पे क़ाबू रक्खोथक गए हो तो मिरे काँधे पे बाज़ू रक्खो– इफ़्तिख़ार नसीम
ये मज़ा था दिल-लगी का कि बराबर आग लगतीन तुझे क़रार होता न मुझे क़रार होता– दाग़ देहलवी
देखूँ तिरे हाथों को तो लगता है तिरे हाथमंदिर में फ़क़त दीप जलाने के लिए हैं– जाँ निसार अख़्तर
हम तो समझे थे कि बरसात में बरसेगी शराबआई बरसात तो बरसात ने दिल तोड़ दिया– सुदर्शन फ़ाकिर
प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता हैनए परिंदों को उड़ने में वक़्त तो लगता है– हस्तीमल हस्ती
करूँगा क्या जो मोहब्बत में हो गया नाकाममुझे तो और कोई काम भी नहीं आता– ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर
तुम को आता है प्यार पर ग़ुस्सामुझ को ग़ुस्से पे प्यार आता है– अमीर मीनाई
जिस की आँखों में कटी थीं सदियाँउस ने सदियों की जुदाई दी है– गुलज़ार
रोमांटिक शायरी Love Shayari in Hindi- सौ रंग है किस रंग से तस्वीर बनाऊँ
सौ रंग है किस रंग से तस्वीर बनाऊँमेरे तो कई रूप हैं किस रूप में आऊँ
क्यूँ आ के हर इक शख़्स मिरे ज़ख़्म कुरेदेक्यूँ मैं भी हर इक शख़्स को हाल अपना सुनाऊँ
क्यूँ लोग मुसिर हैं कि सुनें मेरी कहानीये हक़ मुझे हासिल है सुनाऊँ कि छुपाऊँ
इस बज़्म में अपना तो शनासा नहीं कोईक्या कर्ब है तन्हाई का मैं किस को बताऊँ
कुछ और तो हासिल न हुआ ख़्वाबों से मुझ कोबस ये है कि यादों के दर-ओ-बाम सजाऊँ
बे-क़ीमत-ओ-बे-माया इसी ख़ाक में यारोवो ख़ाक भी होगी जिसे आँखों से लगाऊँ
किरनों की रिफ़ाक़त कभी आए जो मयस्सरहम-राह मैं उन के तिरी दहलीज़ पे आऊँ
ख़्वाबों के उफ़ुक़ पर तिरा चेहरा हो हमेशाऔर मैं उसी चेहरे से नए ख़्वाब सजाऊँ
रह जाएँ किसी तौर मेरे ख़्वाब सलामतइस एक दुआ के लिए अब हाथ उठाऊँ
– अतहर नफ़ीस
रोमांटिक शायरी Love Shayari in Hindi- बूंदों की तरह छत से टपकते हुए आ जाओ
बूंदों की तरह छत से टपकते हुए आ जाओबरसात का मौसम है बरसते हुए आ जाओ
ख़ुश्बू हो तो झोंके की तरह फूल से निकलोदिल हो तो मिरी जान धड़कते हुए आ जाओ
दो गाम पे मय-ख़ाना है दफ़्तर से निकल करइस भीगते मौसम में टहलते हुए आ जाओ
मौसम के बहाने गुल-ओ-गुलज़ार निकल आएतुम भी कोई बहरूप बदलते हुए आ जाओ
-जावेद सबा
रोमांटिक शायरी Love Shayari in Hindi- न तुम ज़बाँ से जवाब देना
न तुम ज़बाँ से जवाब देनाजो दे सको तो गुलाब देना
न कह सको तो, तो ऐसा करनाकि फूल रख कर किताब देना
न मैं मोहब्बत में तुम से लूँगीन तुम ही मुझ को हिसाब देना
मरी तरफ़ से भी ले के जानाये फूल उन की जनाब देना-नील अहमद
रोमांटिक शायरी Love Shayari in Hindi- ढल चुकी रात मुलाक़ात कहाँ सो जाओ
ढल चुकी रात मुलाक़ात कहाँ सो जाओसो गया सारा जहाँ सारा जहाँ सो जाओ
सो गए वहम-ओ-गुमाँ वहम-ओ-गुमाँ सो जाओसो गया दर्द-ए-निहाँ दर्द-ए-निहाँ सो जाओ
कब तलक दीदा-ए-नम दीदा-ए-नम दीदा-ए-नमकब तलक आह-ओ-फ़ुग़ाँ आह-ओ-फ़ुग़ाँ सो जाओ
आह अब टूट चला टूट चला टूट चलाआह ये रिश्ता-ए-जाँ रिश्ता-ए-जाँ सो जाओ
उठ चले दिल के मकीं दिल के मकीं दिल के मकींलुट गया सारा मकाँ सारा मकाँ सो जाओ
-जावेद कमाल रामपुरी
रोमांटिक शायरी Love Shayari in Hindi- सुला कर तेज़ धारों को किनारो तुम न सो जाना
सुला कर तेज़ धारों को किनारो तुम न सो जानारवानी ज़िंदगानी है तो धारो तुम न सो जाना
मुझे तुम को सुनानी है मुकम्मल दास्ताँ अपनीअधूरी दास्ताँ सुन कर सितारो तुम न सो जाना
तुम्हारे दाएरे में ज़िंदगी महफ़ूज़ रहती हैनिज़ाम-ए-बज़्म-ए-हस्ती के हिसारो तुम न सो जाना
तुम्हीं से जागता है दिल में एहसास-ए-रवा-दारीक़याम-ए-रब्त-ए-बाहम के सहारो तुम न सो जाना
अगर नींद आ गई तुम को तो चश्मे सूख जाएँगेकभी ग़फ़लत में पड़ कर कोहसारो तुम न सो जाना
तुम्हीं से बहर-ए-हस्ती में रवाँ है कश्ती-ए-हस्तीअगर साहिल भी सो जाएँ तो धारो तुम न सो जाना
सदा-ए-दर्द की ख़ातिर तुम्हें ‘कौसर’ ने छेड़ा हैशिकस्ता-साज़ के बेदार तारो तुम न सो जाना
-कौसर सीवानी

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